24 दिसंबर 2019 - 13:24
आयत क्या कहती है? दंड आने से पहले तक, तौबा की संभावना रहती है।

पाप पर पछतावा, तौबा के मार्ग में पहला क़दम है किंतु यह पर्याप्त नहीं है बल्कि इसका प्रभाव उसके विचार और कर्म में दिखाई देना चाहिए और यह स्पष्ट हो जाना चाहिए।

सूरए ताहा की आयत क्रमांक 82 का अनुवादः

और निश्चय ही मैं उसके लिए अत्यन्त क्षमाशील हूँ जो तौबा कर ले और ईमान ले आए और अच्छे कर्म करे फिर सीधे मार्ग पर चलता रहे।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

जो भी अपनी अतीत की ग़लतियों की क्षतिपूर्ति करे और ईमान व सदकर्मों द्वारा ईश्वरीय मार्गदर्शन को स्वीकार करे और निरंतर अच्छे कर्म करता रहे तो वह ईश्वरीय दया व क्षमा का पात्र बनेगा।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:      

  1. ईश्वर की प्रशिक्षणिक शैली में, धमकी और प्रोत्साहन के साथ ही दंड और पारितोषिक का भी उल्लेख होता है।

  2. इस्लामी विचारधारा में ईश्वर की दया से निराशा, एक बहुत बड़ा पाप है

  3. कोई भी बंद गली में नहीं फंसता क्योंकि हर स्थिति में ईश्वर की ओर वापसी और उसकी ओर से दया व कृपा की प्राप्ति की संभावना मौजूद रहती है।